Trump tariff announcement: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने बुधवार को दुनिया भर के देशों के खिलाफ पारस्‍परिक टैरिफ की घोषणा कर दी है. ट्रंप ने जिन देशों पर टैरिफ लगाया है, उनमें उसके सबसे करीबी व्यापारिक साझेदार भी शामिल हैं. पारस्‍परिक टैरिफ की घोषणा के बाद दुनिया में विनाशकारी ट्रेड वार की आशंका गहरा गई है. ट्रंप ने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में बोलते हुए चीन और यूरोपीय संघ पर सबसे कठोर टैरिफ लगाए हैं, जिसे उन्होंने “लिबरेशन डे” ​​कहा है. ट्रंप के भाषण के दौरान ही डॉलर यूरो के मुकाबले एक प्रतिशत तक गिर गया और अन्य प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले भी उसमें गिरावट दर्ज की गई. 

चीन पर 34 प्रतिशत टैरिफ लगाया

डोनाल्‍ड ट्रंप अपने भाषण में कहा कि दशकों से हमारे देश को निकट और दूर के देशों ने और दोस्‍तों और दुश्‍मनों ने लूटा है. ट्रंप ने उन देशों पर सबसे ज्‍यादा टैरिफ लगाया है, जिन्हें उन्होंने “हमारे साथ बुरा व्यवहार करने वाले देश” कहा है. इनमें चीन भी शामिल है, जिसके सामानों पर 34 प्रतिशत, प्रमुख सहयोगी यूरोपीय संघ पर 20 प्रतिशत और जापान पर 24 प्रतिशत और भारत पर 26 प्रतिशत टैरिफ लगाया गया है. 

अमेरिकी निर्यात का आधा ही लगा रहे हैं: डोनाल्‍ड ट्रंप

डोनाल्‍ड ट्रंप ने करों की सूची वाला एक चार्ट दिखाया और कहा कि वे “बहुत दयालु” हैं और इसलिए वे उन देशों द्वारा अमेरिकी निर्यात पर लगाए गए कर की आधी राशि ही लगा रहे हैं. बाकी के लिए ट्रंप ने कहा कि वे ब्रिटेन सहित अन्‍य देशों पर 10 प्रतिशत का “बेसलाइन” टैरिफ लगाएंगे. 

जब ट्रंप ने कहा कि टैरिफ “अमेरिका को फिर से समृद्ध बनाएंगे” तो कैबिनेट सदस्यों के साथ-साथ स्टील, तेल और गैस सहित अन्‍य उद्योगों के हैट पहने श्रमिकों ने खुशी मनाई. 

डोनाल्‍ड ट्रंप ने कहा, “यह मुक्ति दिवस है,”. साथ ही कहा कि इसे “हमेशा उस दिन के रूप में याद किया जाएगा, जिस दिन अमेरिकन इंडस्‍ट्री का पुनर्जन्म हुआ, जिस दिन अमेरिका का भाग्य फिर से हासिल हुआ.”

ट्रंप को पहले ही चेता चुके हैं एक्‍सपर्ट

डोनाल्‍ड ट्रंप ने कई सप्‍ताह पहले ही इस कदम की घोषणा कर दी थी. उन्‍होंने जोर देकर कहा था कि टैरिफ अमेरिका को अन्य देशों द्वारा “धोखा” दिए जाने से बचाएंगे और अमेरिकन इंडस्‍ट्री के लिए एक नए “स्वर्ण युग” को बढ़ावा देंगे. हालांकि कई एक्‍सपर्ट ने चेतावनी दी है कि टैरिफ से घरेलू मंदी का जोखिम बढ़ सकता है, क्‍योंकि इसकी लागत अमेरिकी उपभोक्ताओं पर ही डाली जाएगी और दुनिया में एक विनाशकारी ट्रेड वार छिड़ सकता है. 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *