मुंबई महानगर पालिका चुनाव से पहले महाराष्ट्र की राजनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है. बीस साल से चली आ रही अदावत खत्म करते हुए उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे एक बार फिर साथ आ गए हैं. दोनों नेता, जो 2005 में सियासी तौर पर अलग हो गए थे, अब गठबंधन में मिलकर मुंबई महापालिका का चुनाव लड़ रहे हैं.
मातोश्री से उद्धव ठाकरे का संदेश
NDTV Digital Hindi से खास बातचीत में उद्धव ठाकरे ने कहा, “हमारा महापौर बनेगा जरूर और मुंबईकर बनाएंगे.”
उन्होंने बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा कि मनिसिपल चुनाव में धर्म और भाषा की राजनीति नहीं होनी चाहिए. उद्धव ने दावा किया कि शिवसेना ने हमेशा मुंबई की सेवा की है- चाहे वह कोस्टल रोड का निर्माण हो, मुंबई मॉडल हो या शिक्षा और स्वास्थ्य में सुधार.
बीजेपी पर तीखा हमला
उद्धव ठाकरे ने बीजेपी की नीतियों को “खतरनाक” बताते हुए कहा, “बीजेपी अमीबा की तरह है, जो बाकी सबको खत्म करना चाहती है.” उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी ने लोकतंत्र को कमजोर करने की कोशिश की है और विपक्षी उम्मीदवारों को धमकाने के मामले सामने आए हैं.
राज ठाकरे के साथ गठबंधन पर सवाल
क्या राज ठाकरे के साथ गठबंधन से उद्धव की सर्वसमावेशी छवि को नुकसान होगा? इस पर उद्धव ने कहा, “हमने कभी भाषा या धर्म के आधार पर भेदभाव नहीं किया. मुंबई में सभी समुदायों के लिए काम किया है.” उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि कोरोना काल में मुंबई मॉडल की सराहना सुप्रीम कोर्ट और अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने की थी.
महाविकास आघाडी क्यों नहीं बनी?
उद्धव ने स्पष्ट किया कि शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी उनके साथ है, भले ही औपचारिक गठबंधन न हुआ हो. उन्होंने कहा कि विपक्षी खेमे में एकजुटता है, जबकि महायुति के भीतर मतभेद साफ दिख रहे हैं.
चुनाव में मुद्दे
उद्धव ठाकरे ने कहा कि शिवसेना आज भी मराठी मानुष के अधिकारों के लिए चुनाव लड़ रही है, लेकिन मुंबई में सभी समुदायों के लिए विकास कार्य किए गए हैं. उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे में सुधार को अपनी उपलब्धि बताया.
